पुरांण हिंदू साहित्य का प्राथमिक बेसिक स्तर का साहित्य है उपनिषद पुराणों से उच्च स्तर का द्वितीयक स्तर का साहित्य है वेद हिंदू साहित्य का ग्रेजुएशन के पश्चात पोस्ट ग्रेजुएट या स्नातकोत्तर का साहित्य है । जिसमें दर्शन यदि आता है तभी वेद अध्ययन का परिणाम सार्थक आता है ।यदि दर्शन नहीं आता है तो वेद अध्ययन का परिणाम निरर्थक , या अर्थ का अनर्थ , या तर्क का कुतर्क में बदल जाता है । । जबकि अलग से 6 दर्शन या 14 दर्शन सम्यक रूप से पढ़े जाएं तब मनुष्य में पीएचडी के समकक्ष या उच्च योग्यता आ जाती है ।
इसमें विशेष बात यह है कि मनुष्य को धारणा ध्यान समाधि त्रयमेक संयमः में त्रयंबकेश्वर का विशेष ज्ञान विवेक अवश्य हो जाए । बगैर विवेक के यदि वेद और दर्शन पढ़े जाते हैं तो परिणाम खतरनाक और भयंकर आ सकते हैं । क्योंकि वेद और दर्शन में जो वाक्य लिखे हैं वे द्विअर्थी हैं या अनेक अर्थी विप्रयाय /प्र्यावाची हैं । जिनका अनुवाद या प्रस्तुति वक्ता की योग्यता पर निर्भर है । यदि वक्ता अहिंसक स्वभाव का है तो अर्थ कुछ और लिखेगा और यदि वक्ता अहिंसक स्वभाव का है तो अर्थ कुछ और लिखेगा । इसी तरह से यह नियम समझने वाले पर भी लागू होता है ।।
No comments:
Post a Comment