स्थितप्रज्ञा अवस्था कैसे प्राप्त की जा सकती है?


स्थितप्रज्ञ का मतलब है सब कुछ बैठे हुए एक जगह बिना हिले दुले होने पर —संपूर्ण विश्व का ज्ञान अपने आप प्राप्त हो जाए ःःःः अर्थात हम बैठे बैठे अपनी आंखों से जहां चाहे जिस जगह का दर्शन कर सकें , हम बैठे बैठे अपने कानों से जहां चाहे जिस जगह का ध्वनि नाद या अपने लोगों की दुश्मनों की जिसकी चाहे उसकी आवाज सुन सके और इतना ही नहीं हम बैठे बैठे जहां चाहे जैसे भोजन के स्वाद सुगंध अनुभव कर सकें इस सब को पंच मात्रा सिद्धि कहा जाता है । यह उन लोगों में विकसित होता है जो लोग अपने दिमाग के अवचेतन स्तर से अपना जीवन तनाव रहित होकर जीते हैं । जो तनाव युक्त होकर जीवन जीते हैं उनके अवचेतन मन की अवस्था डिस्टर्ब / बाधित होने से उनकी स्थितप्रज्ञ अवस्था की स्थिति खत्म हो जाती है । इसे पंच मात्रा सिद्धि कहा जाता है इसका कहना आसान है करना मुश्किल है ।

यदि आप पंच तमात्रा सिद्धि के बारे में जानना चाहते हैं तो श्रीराम शर्मा के ग्रंथ गायत्री महाविज्ञान को खरीदें और उसमें पंच मात्रा सिद्धि पर विस्तार से बताया गया है । इसके अलावा स्वामी ओमानंद सोम तीर्थ का पातंजल योग प्रदीप खरीदें उस पर भी पंच मात्रा सिद्धि के बारे में बताया गया है । परंतु बिना गुरु के शिक्षा ग्रहण करना पुस्तकों से पढ़ कर और उस पड़ी हुई शिक्षा के आधार पर प्रयोग करते समय यदि कुछ अनिष्ट या बुरा हो जाए ।जैसा कि अक्सर होता है ःः लोग पागल हो जाते हैं अंधे बहरे विक्षिप्त हो जाते हैं डिप्रेशन में चले जाते हैं । तो कृपया मुझे दोष मत देना।


इस पर मैं आपसे बहुत आसान शब्दों में यह कहूंगा यह स्थितप्रज्ञा सिद्धि उस समय की बात है जब संसाधन नहीं थे वर्तमान समय में स्थितप्रज्ञ होना कोई बड़ी बात नहीं है बस आपके हाथ में एंड्रॉयड फोन हो या घर में कंप्यूटर हो इंटरनेट का कनेक्शन हो घर बैठे बैठे मनचाहा देखिए मंन चाहा सुनिये और बिना साधना सिद्धि के झंझट , पचड़ों में पत्रों में पढ़े बिना स्थितप्रज्ञ बन जाइए । कितना आसान तरीका बताया मैंने स्थितप्रज्ञ बनने का लेकिन भाई इसमें खर्चा आता है ।। और जो पुराना तरीका है उसमें खर्चा नहीं उसमें साधना सिद्धि समय खराब होता है पता नहीं सिद्धि कितने समय बाद मिले यह साधक पात्रता पर निर्भर करता है ।

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