जब कोई व्यक्ति बेतुकी बात करता है तो लोग उसे ऐसा क्यों पूछते है की "अलिबाग से आया है क्या?"


यह एक अरबी कहावत है । अरब में एक अली नाम के व्यक्ति का खजूर का बाग था जो लोग उसके खजूर चुराते थे या खजूर चुराने की नियत से बाग में घुस जाते थे या रात में उसके बाग में रुक जाते थे तो वह उन्हें खजूर चुराने या खजूर चुराने की नियत रखने वाले लोगों को बड़ी विचित्र अश्लील सजा देता था । कि उस अश्लील सजा मिलने के बाद मनुष्य जब अली के बाग से बाहर निकलते तो उनकी नजरें नीची झुकी हुई होती थी वे स्त्रीयोचित व्यवहार करने लगते थे ।उनका हेकड़ी पुरुषोचित गुंण निकल जाता था । तब लोग समझ जाते थे कि अली ने इनके साथ कैसा सलूक / कुकृत्य / व्यवहार किया है । तभी से इस कहावत बन गई है कि जो लोग बेतुकी बात करते हैं या जिनकी बात करने के दौरान नीचे भी नजरें रहती हैं या अपनी बात पर उज्डपन से जमे रहते हैं । दूसरे लोगों बात नहीं समझते हैं , ना समझने का प्रयास करते हैं । तो ऐसे अंधे , बहरे - वक्ता श्रोताओं को कहा जाता है कि अलीबाग से आया है क्या ? तेरा मुँह क्यौं नहीं खुलता है?। उज्ज्डपन से क्यों बोलता है? बात का सही तरीके से जबाब क्यों नहीं देता है। एक अश्लील कहावत है जो स्पष्ट रूप से नहीं खुलकर लिखी जा सकती । इसी से लोग समझ सकते हैं । इतना ही काफी है ।

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