देरी न करें जरूर ले जाये।अकसर लोग मनोरोगियों की अनदेखी करते हैं परंतु परिणाम यह आता है कि लोगों का ध्यान संकेद्रण खराब होने से ,मानसिक ऊर्जा अधिक मात्रा में अपव्यय करने से वह समाज में अपना ध्यान ठीक तरह से केंद्रित नहीं कर पाने वह अपने जीवन में शैक्षिक उपलब्धियों के क्षेत्र में पिछड़ने लगते हैं ।लोग मनोचिकित्सक के पास तब जाते हैं जब मनोरोगियों के हालात काबू से बाहर निकल जाते हैं जैसे भूत प्रेत बाधा समझते हुए ,गुनिया ,ओझा टोने टोटके ठीक करनेवाले तांत्रिक लोग मनोरोगियों की मानसिक स्थिति को और खराब कर दिया करते हैं ।
वैसे चैतन्यता विस्तार नियम के अनुसार चेतना सर्वप्रथम योनक्षेत्र में प्रसफुटित होती है बाद में वह विकसित होती हुई मानसिक क्षेत्र की ओर जाकर मानसिक विकास किया करती है ।बच्चों की पहली स्वाभाविक रूचि यौनक्षेत्र में हुआ करती है ।
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