हम एक सकारात्मक ऊर्जा को कैसे प्रवाहित करें ताकि वातावरण भी सकारात्मक प्रभवित हो?


सकारात्मक ऊर्जा पूर्ण विचार और क्रियाकलापों और नकारात्मक ऊर्जा विचारों क्रियाकलापों से सभी जीव स्वभावतः प्रभावित करते हैं । जिनकी सोच, चित्त सकारात्मक होते हैं वे सकारात्मकता पूर्ण विचार स्वीकार किया करते हैं।इसके विपरीत जो लोग/जीव नकारात्मक सोच चित्त मन वाले होते हैं वे नकारात्मक विचारों को आसानी से स्वीकार कर लिया करते हैं ।उनके मन मस्तिष्क में से नकारात्मक ऊर्जा स्वतः ही वातावरण में प्रवाहित होती है। सकारात्मक ऊर्जा हो या नकारात्मक ऊर्जा हो वह उस जीव की मानसिक शक्ति और मन से उत्पन्न होने वाले विचारों की प्रचंडता जीव की इच्छा शक्ति कल्पना शक्ति संकल्प शक्ति के सम्मिश्रण पर निर्भर करती है ।

प्रत्येक व्यक्ति/जीव का एक सीमित ऊर्जा प्रवाह क्षेत्र औरा होता है ।जो भी जीव उसके औरा क्षेत्र में आ जाता है तो यदि उसका औरा क्षेत्र उससे छोटा कमजोर होता है तो उसका मन मस्तिष्क काम करना बंद कर दिया करता है या ठीक से काम नहीं किया करता है ।यदि उसका औरा क्षेत्र उससे प्रबल होता है तो पहले वाले मनुष्य का मन मस्तिष्क ठीक से काम नहीं किया करता है।उसे बेचैनी होने लगती है।उसका मन उचाट होने लगता है।ऐसे में वह थोड़ी देर बाद अपना स्थान बदल कर अन्यत्र कहीं चला जाता है ।

ऐसे में यदि आपके पास हंसमुख प्रसन्न चित्त वाला सकारात्मकता पूर्ण प्रबल विचारों का मनुष्य आया है । तो वह बिना कुछ कहे बोले आपको अपने सकारात्मकता पूर्ण विचारों के प्रभाव पूर्ण औरा से सकारात्मक ऊर्जा से परिपोषित कर देगा । आपको अपने अंदर सकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से स्फूर्ति उत्साह अनुभव होगा ।आप अपने को बिना थका हुआ ऊर्जा वान समझने लगेंगे । यदि आपके पास दुखी परेशान थका हुआ मनहूस चेहरा जो ऊर्जा हीन नकारात्मकता पूर्ण भरे विचारों वाला मनुष्य आया है तो वह बिना कुछ कहे बोले आपको अपने नकारात्मकता पूर्ण विचारों से बने तेज हीन मुखमंडल निस्तेज चेहरा दिखा कर आपको ऊर्जाहीन थका थका हुआ सा कर दिया करता है।क्योंकि उस नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव वाले मनुष्य ने बिना कुछ किए धरे आपकी अतिरिक्त सकारात्मक ऊर्जा सोख ली है । आप अपने आपको ऊर्जा हीन थकान आलस्य से भरा हुआ महसूस करने लगोगे । ऐसा विचित्र प्रभाव होता है सकारात्मकता पूर्ण विचार वाले औराधारी मुखमंडल का जिसके देखते ही हम खुशी और प्रसन्नता से भर कर ऊर्जा स्फूर्ति उत्साह युक्त हो जाते हैं । नकारात्मकता पूर्ण विचार वालेऔराधारी मुखमंडल को देखकर हम अकारण भय दुख कलेश से भर कर ऊर्जा हीन थके थके निस्तेज ऊर्जा हीन हो जाते हैं।

अब रहा आपके प्रश्न का दूसरा भाग सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित करने वाले आप और हम कौन होते हैं सकारात्मक ऊर्जा ,नकारात्मक ऊर्जा की हवा चलाने वाले या सकारात्मक/नकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित करने वाले इस विषय पर जरूर किसी ने आपको गलत ज्ञान देकर भ्रमित कर दिया है जिससे आप गलत ख्याली ,गलत धारणाओं, से प्रभावित होकर सकारात्मक /नकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित करने वाले पवन अवतारी की असंभव सोच बना बैठे हैं ।और हमको भी पवनपुत्र बनाने की सोच रहे हैं।हम आपके सबालों की रौ में बहकर पवनपुत्र नहीं बनने वाले ।

अब आपके सबाल का माकूल जवाब वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा/नकारात्मक ऊर्जा का बनाने के लिए आपको कुछ भी नहीं करना है बस थोड़ा सा धन अन्न खर्च करना होगा । यदि आप वातावरण को सकारात्मक बनाना चाहते हैं तो सकारात्मक लोगों को एक उत्तम स्थल पर एकत्रित करके लोगों को सकारात्मक लोगों को उत्तम पोषित सामूहिक भोजन प्रीति भोज कराकर उन सभी लोगों को उद्देश्य पूर्ण सार्थक सकारात्मकता पूर्ण विचार देना है दुखी चित वाले लोगों का मानसिक तनाव हल्का या दूर करने के लिए उनका मनोरंजन कराने का व्यय वहन करना होगा , आपने शादी विवाह के सामूहिक प्रीतिभोज के अवसर पर लोगों को सकारात्मक पौजिटिव दृष्टिकोण बनते देखा होगा और मृतक परिवार में मृतक के निकट नकारात्मक दृष्टिकोण बनते देखा होगा । सकारात्मकता पूर्ण विचारों वाले मनुष्यओं के एकत्रित होने पर उस स्थान पर सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होने लगेगी । यदि वातावरण को नकारात्मक ऊर्जा क्षेत्र बनाना है तो नकारात्मक विचारोंं वाले लोगों को किसी बुरे स्थान पर शमशान मरघट, कट्टीखाना/कसाई घर /बूचड़खाने के पास एकत्रित करके उनको नकारात्मक दुष्ट विचार देने हैं ।नकारात्मक कृत्य शराब पिलाकर कर दुष्टतापूर्ण अश्लीलता पूर्ण चर्चा करानी होगी कुछ समय पश्चात नकारात्मक लोगों के एकत्रीकरण से उस वातावरण में नकारात्मकता की ऐसी हवा चलेगी जिसे नियंत्रित करने पर आपको अपने सकारात्मक/नकारात्मक ऊर्जा प्रवाह शक्ति के प्रभाव का पता चल जायेगा ।

इस प्राकृतिक सिद्धांत का लाभ अक्सर विद्वान लोग व्याख्यान देने में उठाया करते हैं । वे सकारात्मकता की हवा चलाने के लिए सकारात्मक सोच वाले विद्वानों को एक स्थान पर एकत्रित करके उन्हें सकारात्मक विचार देकर सकारात्मक ऊर्जा युक्त कर दिया करते हैं फिर सकारात्मकता से परिपूर्ण परिप्रेक्ष्य परिपोषित विचार के प्रसार प्रचार का उद्देश्य देकर उन विद्वानों को विभिन्न क्षेत्रों में मानव समाज को नयी सोच की शिक्षा देने को भेज दिया जाता है।इस प्रकार से समाज में सकारात्मकता की हवा चलने लगती है । ऐसी सकारात्मकता की हवा चलाने में राजपुरुष /राजनीतिक लोग और धार्मिक लोग सिद्ध हस्त होते हैं।जिससे समाज में ,परिवार में अक्सर समय समय पर परिवर्तन होते रहते हैं । इस प्रकार से हंस मुख प्रसन्न चित्त वाले लोग मारे खुशी का वेग न सह पाने से नाचने गाने गुनगुनाने लगते । यदि सकारात्मकता की आंधी चलानी ह तो सपना चौधरी के प्रोग्राम का खर्च उठाना पड़ेगा ।

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