स्मृति क्या है? ये कितने प्रकार की होती है?


स्मृति भाषा दृष्टि श्रवण प्रत्यक्षीकरण अधिगम ध्यान की तरह मस्तिष्क की एक बौद्धिक क्षमता है । जो मस्तिष्क में अनुभव सूचना और ज्ञान के रूप में संग्रहित होती है और उचित समय पर दिमाग से निकल कर हमें चित्र अंकित या रिकॉर्डेड रूप में पूर्व सूचना का ब्यौरा उपलब्ध कराती है । स्मृति एक मानसिक प्रक्रिया है जो दिमाग के अपने निजी तौर तरीके से सूचनाओं को कूट बंद कोडिंग करके सूचनाओं का संग्रह करके उन्हें समय-समय पर स्मरण और विस्मृति करके मनुष्य को मस्तिष्क को सुरक्षित रखती है । स्मृति के प्रकार स्मृति के तीन मुख्य प्रकार संग्रह होते हैं ।

न० 1 :—संवेदी स्तर स्मृति

न०2 :— अल्पकालीन स्मृति

नं०3 :—दीर्घकालीन स्मृति ।

स्मृति का मस्तिष्क में संचयन न्यूरोग्लियल सेल के अंदर होता है जो उचित समय पर न्यूरॉन को सही सूचना देकर मनुष्य से सही कार्य संपादन कराती है यदि न्यूरॉन को सही समय पर उचित सूचना नहीं मिलती है तो न्यूरॉन गलत सूचना देकर या सूचना हीन अवस्था में या पुरानी सूचना देकर कार्य करने वाले व्यक्ति को स्मृति हीन विस्मृत मूड से कार्य करने पर गलती हो जाती हैं परिणाम उचित नहीं आता है। अधिकतम गलती करनेवाले मनुष्य कोमूर्ख पागल आदि तरह-तरह के गलत शब्दों से विश्लेषित किया जाता है ।स्मृति की क्षमता को नियंत्रित करने के लिए मानव मस्तिष्क अवचेतन मन के स्तर से अतिरिक्त अनावश्यक स्मृतियों को समय-समय पर हटाकर विसंगत या डिलीट किया करता है । जिससे मस्तिष्क की क्षमता सामान्य बनी रहती है । अन्यथा स्मृति के अति धार से सिर में दर्द रहने लगता है । जो स्वप्न देखने पर अतिरिक्त स्मिति भार निकल जाने पर मन हल्का मस्तिष्क तनाव हीन हो जाने से चित्त में हल्का पन ऊर्जावान स्फूर्ति महसूस होती है ।

स्मृति अनुवांशिक होती है। सामान्य तः पुरुषों की तुलना में महिलाओं की स्मृति उत्तम होती है ।स्मृति का गुंण बच्चों में उनकी मां से आता है तथा तर्क क्षमता का गुंण पिता पक्ष से आता है ।जीवन में सुख समृद्धि और दीर्घायु का आधार स्मृति पर निर्भर करता है ।

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