पहले तो दहेज का मतलब समझो फिर ऐसी सोच विचार बनाओ
दहेज की परिभाषा है :-शादी के समय पर पुत्री को ,न कि वर पक्ष को ; पिता पक्ष की ओर से उनके भविष्यक जीवन की सुविधा सुरक्षा के लिए दिये गये उपहार और धनराशि को दहेज कहते हैं ।
यह प्रथा नहीं , आवश्यकता है सहमति है पुत्री के भावी जीवन में सामाजिक सुविधा है । अधिकार नहीं है ; अनुबंध नहीं है ;वैद्युत बंध नहीं है कि यदि दहेज नहीं मिला है तो शादी विवाह संबंध खट्टे कड़वे या खत्म कर दिये जायें ।
आपकी सोच के अनुसार दहेज एक यह गरीब निर्धन व्यक्ति और उसकी पुत्री के जवान होने पर उसे उसकी जवानी की कीमत का सामाजिक दंड है ,कि उस गरीब की बेटी पर जवानी क्यों आईं ? , उस गरीब की बेटी को गरीबी में यौनानन्द के मौलिक पशुज ,मानव अधिकार से कैसे रोका जाए ?उस गरीब की बेटी को , युग्ल की संतान को पैदा होने से कैसे रोका जाए? यह उस गरीब की बेटी के जैविक ,पशुज , मानवीय अधिकारों का हनन है ।क्या किसी भी गरीब की बेटी को धन की कमी से ,पर्याप्त दहेज न मिलने पर उसके विवाह संबंध से वंचित कर देना , विवाह संबंध खत्म कर देना ,यह दहेज नहीं अर्थदंड है ।। जो उसके बाप से वसूली करना चाहिए कि उस गरीब के घर बेटी क्यों पैदा हुई ?
। जिसे आप अधिकार बनाने की सोच की फिराक में हैं आपका यह दहेज प्रथा का अधिकार समाज संस्कृति को बहुत मंहगा और भारी पड़ेगा ।अब से १४००वर्ष पहले अरब के लोगों की यही मानसिकता बन गई थी जिसे मुहम्मद साहब ने ऐसा ठीक कर दिया कि आज उनके अनुयायियी धन से धनी लोगों के धर्म काफिर (काफिलान) काफिया संस्कृति पर भारी पड़ रहे हैं ।।
समझ लेना इसी से ना समझ में आये तो कुछ पैसे ख़र्च करके कुरान पढ़ना अब यह हिन्दी में भी उपलब्ध है लखनऊ वाला ज्यादा विश्वसनीय है ।।अब से १४०० वर्ष पहले जब अरब के लोग बहुत बड़े व्यवसाई थे उनका यूरोपीय क्षेत्र रोम रूमानिया यूनानी क्षेत्र तक प्रभाव था । उनमें भी आज का L G B T W यौन विकृति संबंध सामान्य थे तब उनको मुहम्मद साहब ने अरबी भाषा में समझाया था और वो सुधर गये थे ।। आपको यह दहेज प्रथा से उत्पन्न दुष्परिणाम फोकट /मुफ्त में नहीं समझ में आने वाले । वर्तमान में इसका दूसरा यौन विकृत रूप L,G,B,T,W, है जो धन से ग़रीब , दिमाग से धनी लोगों में पैदा हो रहा है ।
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