कुंडली में राज योग क्या होता है?


बाल्मीकि रामायण के अनुसार :- सूर्य प्रथम घर में चंद्रमा द्वितीय घर में मंगल तृतीय घर में राहु चतुर्थ घर में गुरु पांचवे घर में शुक्र छठे घर में शनि नौवें में घर में पांचवें घर में यदि मौजूद हैं । तो 5 ग्रहों के स्वग्रही ही होने पर राजा बनने का 4 ग्रहों के स्व ग्रही बनने पर राजा का सहायक बनने का , तीन ग्रहों के स्व ग्रही होने पर राजकीय कर्मचारी बनने का , दो ग्रहों के स्व ग्रही होने पर राजकीय लाभ मिलने का योग बनता है यदि व्यक्ति के उपरोक्त ग्रहों में से एक भी स्व ग्रही नहीं है तो उसे राजयोग का लाभ नहीं मिलता है ।

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