भूखा होने की भूखा होने की अवस्था में दिमाग सामान्य रूप से अधिक सक्रिय होकर काम करता है जबकि पेट भर कर खा लेने की अवस्था में दिमाग सामान्य रूप से काम नहीं करता है।व्रत का अर्थ है किसी उद्देश्य परक लक्ष्य के लिए विचारों का क्रमबद्ध रूप से निरंतर आकर उद्देश्य पूर्ति के लिए संकल्प धारण करना । व्रत धारण करने के बारे में / श्रेष्ठ या उत्तम संकल्प धारण करना ही व्रत कहा जाता है।
छांदोग्य उपनिषद में विस्तार से लिखा है जैसे कभी भी बरसते हुए मेंघ या बादल के बारे में किसी भी तरह का कोई भी अपशब्द ना कहें , मेघ या बादल का कार्य निजी नहीं होता सामाजिक कार्य होता है।
दान देते हुए दानदाता या दातार व्यक्ति के बारे में कभी भी अपशब्द ना कहें दानदाता दातार व्यक्ति ईश्वर का साक्षात रूप होता है।
कभी भी अन्न ग्रहण करते हुए किसी भी जी प्राणी पशु को ना रोके अन्न ग्रहण करते समय बाधा उत्पन्न करने का कृत्य दूसरे जीव के प्राणों में जीवन में बाधा डालना है।
प्रत्येक मनुष्य का फेल होना या उसके कार्य का पूर्ण ना होना उसकी उद्देश्य हीनता कही गई है, उद्देश्य हीनता का कारण व्रत या संकल्प धारण में त्रुटि या कमी कहा जाता है। इसलिए व्रत धारण करने को अध्ययन अध्यापन का प्रथम चरण या संकल्प ग्रहण पात्रता कहा गया है भर पेट या छक कर खा लेने के बाद नींद आल्स्य आता है । अध्ययन अध्यापन और संकल्प धारण के कार्य पूरी तरह से सही सटीक नहीं होते हैं । इसलिए व्रत धारण करते समय भूखा रहना गरिष्ठ अन्न न खाना आवश्यक है ।
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