प्राचीन काल की विधवा स्री और आज की विधवा स्री की समस्या में क्या अंतर है? क्या आप सविस्तर बता सकते हैं?


आपके प्रश्न का जवाब शायद अथर्ववेद में प्रकरण देवता नीड में लिखा है जिसमें लिखा है:- जिस स्त्री के पास धन सम्पत्ति है वह विधवा नहीं हो सकती है । विधवा वह स्त्री है जिसके पास अन्न धन वितरण की अधिकार व्यवस्था नहीं है। जिसके पास स्थाई संपत्ति अन्न धन संचालन अचल संपत्ति भूमि नहीं है । जिसके पास जीवन रक्षक संचालक पुरुष पिता भाई वह पति पुत्र नहीं हैं । तथा जो अनेक कुलीन कुल पुरुष ससुर जेठ देवर और पिता के यहां भाइयों से संरक्षित सुरक्षित नहीं है ।वह स्त्री विधवा कही जाती है। परंतु जिस स्त्री के पास साथ समाज में कुल पुरुष साथ हैं जो संसारिक संसाधन उपलब्ध कराने वाले कुल पुरुष के साथ रहती है जैसे ससुराल में ससुर जेठ देवर के साथ पुत्र , पिता के घर साथ में भाई हो ,, धन अन्न वितरण व्यवस्था का अधिकार हो, भू संपत्ति की स्वामी हो ,जो सांसारिक भोग को भोगना जानती हो, वह स्त्री विधवा नहीं कही जा सकती ।

गांव देहात में कहावत है स्त्री के सुहाग का साधन भाई होता है पति नहीं वह जब पति नहीं रहता है तब दूसरे जीवन सहायक पति के विकल्प दूसरे पति पुरुष की व्यवस्था भाई व पिता करा दिया करते हैं दूसरी शादी धरेजा या नियोग पुरुष के रुप में।यह जबाब भी मनुस्मृति के अनुसार अथर्ववेद के अनुसार लिखा गया है। इस लाइन का लोगों ने अपने अपने मत के अनुसार अलग-अलग अर्थ लगाकर तरह-तरह की परिभाषाएं दी हैं । जिसमें समाज के मनु पुरुष संविधान संचालक निर्माताओं ने तो विधवा स्त्री का जीवन ही दूभर बता दिया है कि स्त्रियों को सदैव पुरुषों के नियंत्रण में रहना चाहिए स्त्रियों को स्वतंत्र अकेली नहीं छोड़ना चाहिए यनि स्त्री अकेले अपने जीवन को मान सम्मान स्वाभिमान से नहीं जी सकती है ।यह लाईंन उस समय तक ठीक थी जब स्त्रियां पढ़ीलिखी शिक्षितनहीं थीं । आजके युग में जब स्त्रियां उच्च शिक्षित हैं शिक्षा प्राप्त करके पुरुषों के बौद्धिक कार्य क्षेत्रों में समान समान सिद्ध हो रही हैं तो यह लाईंन व्यर्थ है कि स्त्री विधवा ह, या हो सकती है। मनुस्मृति हमारा पुराना समाज संविधान ग्रंथ आदिकाल में लिखा गया था जिसकी लाइन उस समय के अनुसार उस समय ठीक थी लेकिन वर्तमान में समाज में आदमी की सोच में व्यापक परिवर्तन हुआ है । तो उसके अनुसार हमें मनु स्मृति में अपनी इच्छा अनुसार नए नियम बना कर अपने जीवन को नए नियम के अनुसार जीना सीखना होगा । महिलाओं के गृह उद्यम महत्व को देखते हुए आदिकाल में यह बिना लिखित नियम बनाया गया कि जब भी कोई पुरुष किसी भी महिला से बेटी बहन या अन्य से मिले तो वह उसे मिलते समय कुछ ना कुछ उपहार जो उसके उपयोग का हो या उसके लिए अंशकालिक धन अवश्य उपहार में दे जिससे महिलाओं को धन व्यवस्था वितरण मैं उनका हाथ ना रुके और वह भी बिना उद्यम करने पर भी धनवंती बनी रहे।

अब आते हैं आपके नए जीवन के परिपेक्ष में विधवा स्त्री की स्थिति देखिए ऊपर स्पष्ट जवाब लिखा जा चुका है धनी स्त्री विधवा नहीं होती ह , और निर्धन स्त्री का सदा सुहागन होना भी प्रश्न सूचक कहा जाता है । कारण कि उसके पास उसकी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए उचित धन परिवार में उपलब्ध नहीं होता ।ऐसे में वह धन के आश्रित होकर तरह-तरह से अपने जीवन में , परिवार में ना चाहते हुए भी मन मारकर समझौता करते हुए अपना जीवन मरे हुए मन से जीती है ।अर्थात निर्धन स्त्री धन् न होने के कारण अपना जीवन अपने मनसे अपने जीवन को नहीं जी पाती है ।जबकि जो स्त्रियां धनवान है वे धन के प्रभाव से अपने जीवन को सफल होकर जीती हैं ऐसे में धनी स्त्रियों को विधवा कहना विधवा मानना विधवा समझना मनुष्य की भूल है क्योंकि समस्त सांसारिक संसाधनों का आधार स्रोत धन है जिससे समस्त संसारिक भोग आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं ।तो वर्तमान परिपेक्ष में विधवा शब्द कहना ही गलत है ।आज विधवा स्त्री को एक बार नहीं दो बार नहीं जब तक चाहे तब तक तलाक देकर शादी करने का अधिकार मिल चुका है ।ऐसी अनेकों स्त्रियां समाज में मिल सकती हैं जिन्होंने कई बार तलाक देकर अपने जीवन को अपने अनुसार नए तरीके से जीवन जीने की कोशिश की हैःः। और नए तरीके से जीवन को जी रही हैं ऐसे में वर्तमान परिपेक्ष में मैं यह कहूंगा कि हम सभी बुद्धिजीवी लोगों को विधवा शब्द अपनी निजी जीवन की डिक्शनरी से निकाल देना चाहिए । वह विधवा कैसी जो पिता भाई पुत्र पुरुषों के बीच में रहते हुए अपना जीवन सुख शान्ति से जी रही है ।जिसको जीवन जीने के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ रहा है । समस्या विधवा स्त्रियों को पहले होती थी जिनके पास धन अर्जन का संसाधन नहीं होता था ।वर्तमान की विधवा स्त्रियों जिनके पास धन कमाने के संसाधन मौजूद हैं जो समस्या ग्रस्त बहुत कम होती हैं ।

उचित अवसर मिलते ही वेद की पुस्तक की फोटो स्टेट में इसमें जोड़ दूंगा


No comments:

Post a Comment