आपके हिसाब से विकास का आधार क्या है?


विकास की परिभाषा सभी लोग अपने अपने मंतव्य विवेक विचार से देते हैं जैसे आजकल केवल एक ही विकास सबको पता है और वह भी है आर्थिक विकास अर्थात धन का विकास ढंग से विकास यह परिभाषा पिछले 10 साल से प्रभाव में है । परंतु मेरे हिसाब से विकास की परिभाषा जींस आधारित गुण लक्षण आधारित होती है जिसके आधार पर प्रकृति में केवल प्रकृति के समय के अनुसार फिट रहने वाले जीव विकास करते हैं और जो प्रकृति के अनुसार स्वयं को फिट नहीं रख पाते वह प्रकृति के द्वारा तरह-तरह के संघर्ष विधाओं में उलझ कर मारे जाते हैं ।आपने जो विकास का आधार लिखा है मैं इस पर आपके लिए विकास की व्यापक डिक्शनरी लिख रहा हूं आप अपने हिसाब से तय कर लेना ।

न ०1 : सामाजिक विकास नं०2: परिवारिक विकास नं० 3 :भौतिक विकास नं० 4 : रासायनिक विकास न० 5 : गणितीय विकास नं० 6 : भौगोलिक विकास नं० 7 : ऐतिहासिक विकास नं० 8 : सांस्कृतिक विकास नं० 9 : धार्मिक विकास नं० 10 : निजी विकास नं० 11 : जाति विकास 12: यौवन विकास /यौन विकास 13 : शारीरिक विकास 14 : मानसिक विकास 15 : बौद्धिक विकास 16 : राष्ट्रीय विकास 17 : प्राकृतिक विकास 18 : कृत्रिम विकास

कहने का अभिप्राय है कि आपको जहां भी पड़ने पर कोई शब्द मिले उसके आगे विकास शब्द लिख दीजिए और फिर उस देखिए उसका विस्तार प्रभाव विकास । विकास की परिभाषा ही यही है जो बढ़ रहा है जिसका विस्तार हो रहा है वह विकास कर रहा है जो घट रहा है कम हो रहा है उसका विनाश हो रहा है विकास और विनाश दोनों प्रकृति में साथ साथ चलने वाली क्रियाएं हैं । जब हम विकास को देखते हैं विकास पर चर्चा करते हैं तो प्रकृति में उसके समकक्ष विनाश भी चल रहा होता है जिसे हम अनदेखा अनसुना कर देते हैं ।। जिसका पता परिणाम तब चलता है जब विकास अपनी सीमा पर जाकर रुक जाता है तब उसके बराबर से विनाश बढ़ता हुआ विकास को रोकता हुआ आगे चलता दिखाई देने लगता है । मैं तो यही कहूंगा कि भाई विकास नाम स्थिर स्थाई दृश्य स्थिति परिस्थिति का है ।।जिसे आप विकास समझ रहे हैं । लेकिन मेरे विचार से विकास में परिवर्तन दर को समझना विनाश की पहचान रखना तभी सम्यक विकास माना जाएगा । जैसे लास्ट पॉइंट पर से देखिए जाति विकास जब कोई एक जाति विकास करती है तो दूसरी जातियों का विनाश करती है दूसरे जातियों के विनाश की कीमत पर उस जाति के विकास की दर निर्भर करती है समय के अनुसार यह जातियां भी प्रभावशाली से प्रभावशाली होकर विनाश को प्राप्त होती हैं पुरानी जातियां नष्ट होती रहती हैं नीचे जाती रहती हैं । नई जातियां पुरानी जातियों को दबाते हुए नष्ट करते हुए अपना विकास करती हैं । जैवविविधता विकास के अनुसार ।। इसी प्रकार धर्म का विकास का फंडा है कोई भी धर्म (जीवन पद्धति) अभी तक ऐसा नहीं बना जो स्थिर स्थाई हो कभी किसी धर्म(जीवन पद्धति) के लोग विकास करते हैं तो कभी किसी धर्म के लोग विकास करते हैं।

लेकिन विकास मैं एक बात जो स्पष्ट है वह है प्रभाव विस्तार अब आप अपने विवेक से अपने विकास के बारे में दूसरों के विकास के बारे में अपने तरीके से समझ सकते हैं


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