क्यों गरीबी के गर्भ में ही भविष्य पलता है?


गरीब के पास सिर्फ और सिर्फ केवल सोचने के लिए विचार ,बोलने के लिए शब्द और बिना पदार्थों के निर्मित कृत्याका अस्तित्व हीन अग्नि दृश्य स्वप्न कल्पनाएं होती हैं ।

और यही सब की आवश्यकता योजनाएं बनाने में भविष्य दर्शन में होती है ।

गरीबी में ही साधन हीनता से कार्य को पूरा करने का विकल्प सोचने की विधा /मानसिक अमूर्त चिंतन का विकास होता है ।साधन हीनता से ही कार्य को पूरा करने के लिए दूसरे लोगों से संपर्क संवाद करने की विधा बोलने चीखने चिल्लाने का विकास होता है । इन्हीं सब बेसिक योग्यताओं के दर्शन स्वप्न में /आगम जगत में / भविष्य में होते हैं ।

मेरे विचार से इस लिए कहा जाता है कि भविष्य गरीबी के गर्भ में पलता है ।

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