छद्म आध्यात्मिकता का मतलब है लोगों को आध्यात्मिकता दर्शन के नाम से छलना ,उनको ज्ञान के नाम से ज्ञान की ओट /आड़ में अज्ञान ,भ्रमज्ञान देना ::/छल कपट करके उनका ब्रैन बाश करके उनको अपनी इच्छाओं अपने मानकों के आधार पर उनके मन मस्तिष्क में उनकी सोच विचार पर अपना अधिकार /कब्जा करके उनको अपनी डिक्शनरी/शब्द कोश के अनुसार बोलना सोचना करना सिखा कर आदमी की संतान को अपना पालतू बनाकर अपने भावी परिवार जनों की सुख सुविधाओं को अक्षय /अमर /अमिट करना । खुद भी मौज करना बिना कर्म किए-कराए और अपनी वंशावली की भी मौज पार्टी /पुख्ता इंतजाम करना जिससे उनको भी बिना कुछ कर्म किए उत्तम से उत्तम भोग भोजन पदार्थो की आपूर्ति की निरंतरत व्यवस्था बनी रहे ।
मुंड़ मुड़ाए तीन गुंण , सिर की मिट जाए खाज ।
भोजन दें बावा कहें , लोग कहें महाराज ।।
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