क्या सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों की रुचि एवं जानकारी, भारतीय दर्शन के प्रति बढ़ी है?


सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों की सूची भारतीय दर्शन के प्रति घटी है या बड़ी इस पर तो मैं कुछ नहीं कह सकता । लेकिन मैं यह देख रहा हूं कि सबसे कम अपवोट , सबसे कम शेयर , सबसे कम अध्ययन /देखा गया पर ःःःः मेरे भारतीय अध्यात्म पर दिए गए सवालों के आए हैं । इन्हें बहुत कम लोग पसंद करते हैं ।। हां इतना जरूर पता चल रहा है कि शायद आपकी रूचि जरूर भारतीय दर्शन के प्रति या भारतीय अध्यात्म के प्रति बढ़ रही है ।यह आपके प्रश्नों से पता चल रहा है । इस पर मैं यही कहूंगा कि अधिकतर जो लोगों के ज्ञान में विकृति आई है वह सत्संग के कारण आई है सत्संग में वक्ता को गुरु को थोड़ा सा समय मिलता है बोलने के लिए सत्संग में उच्च कोटि के प्रतिष्ठित व्यक्ति नहीं आते हैं और ना ही उच्च कोटि के विशेष प्रतिभाशाली वक्ताओं को सत्संग सभा स्थल उन पर बोलने के लिए अनुमति दी जाती है ।। इस पर भी और श्रोताओं को भी सब कुछ बहुत जल्दी संक्षेप में चाहिए श्रोता भी सुनने का संयम नहीं बन पाते आपके लिए मैं इस पर यही कहूंगा कि आप कोरा पर सवाल भेजकर हासिल करने के बेहतर है कि आप थोड़ा सा ज्ञान वृद्धि मार्ग में धन खर्च करें । जैसे मार्कंडेय पुराण और शतपथ ब्राह्मण गोपथ ब्राह्मण वेद चार चारो 6 दर्शनीय 16 दर्शन यदि आपने नहीं खरीद सकते हैं । तो आप पंचतंत्र और महाभारत या रामायण को इनके मूल लेखक हैं विष्णुगुप्त , वेदव्यास , तुलसीदास जी आप इनके लिखे ग्रंथों को पढ़ें ।

बहुत भाग्यशाली हैं हम और आप जिन्हें सौभाग्य से इंटरनेट का सानिध्य प्राप्त हुआ है । आज के युग में यदि आप ग्रंथ नहीं खरीद पा रहे हैं तो बहुत अच्छा तरीका हम सौभाग्यशाली लोगों को यह प्राप्त हो रहा है कि आज सब कुछ नेट पर उपलब्ध है आप अपनी पर्सनल इबुक लाइब्रेरी में आप अच्छी अच्छी जो मैंने यह किताब बताइ हैं । इन्हें डाउनलोड करें और पढ़ें ःः रीति नीति अनीति कुरीति संविधान विज्ञान दर्शन इनका अध्ययन किए बिना जीवन जीना और जीवन जीने के बाद मरना व्यर्थ है ।मरने से पहले इन सभी को समझ लिया जाए। मेरे पास अपनी बुक लाइब्रेरी और मोबाइल फोन टाइम में इबुक लाइब्रेरी भी है इसके अलावा में विकिपीडिया , डक डक गो पर भी पढ़ता रहता हूं।

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