मानसिक बीमारी का मुख्य कारण मनुष्य को गलत शिक्षा गलत संस्कार गलत समाज परिवार में पालन-पोषण है । यह दोनों प्रकार से संभव है प्रथम 1:-तक मनुष्य को गलत शिक्षा आचरण सभ्यता के रूप में और दूसरे 2:- अनुवांशिकता के रूप में भी मानसिक बीमारियों के मिलने या उत्पन्न करने की संभावना बनी रहती है । क्योंकि मानसिक बीमारियों में मुख्य कारण मस्तिष्क की संरचना और कार्य व्यवहार है जो कि काफी हद तक अनुवांशिकता पर कम और गलत शिक्षा संस्कृति संस्कार ज्यादा निर्भर करता है । । फ्रांसिस गार्डन और कार्ल पीयरसन के अनुसार :— - यदि मनुष्य को जब भी सत्य ज्ञान हो जाता है उसका भ्रम दूर हो जाता है उसे यथार्थ ज्ञान हो जाता है तो यथार्थ ज्ञान होते ही उसकी मानसिक बीमारी अपने आप हट जाती है जैसे डिप्रेशन या अवसाद हमें तभी तक दबाकर रखता है जब तक हमारे ऊपर समाज की लोगों की सांस्कृतिक परंपराओं रितिवाज का आवरण बना रहता है जैसे ही हमारे मन से समाज के सांस्कृतिक भय खत्म हो जाती है । हमें समाज की वास्तविकता परिवार की वास्तविकता पता चल जाती है । लोगों की वास्तविकता पता चल जाती है । तो अपने आप अवसाद या डिप्रेशन समाप्त हो जाता है । इसके अलावा अन्य सामाजिक मानसिक बीमारियां निजी मानसिक बीमारियां भी खत्म हो जाती हैं जैसे पीडोफीलिया हिस्टीरिया सिजोफ्रेनिया मेनिया आदि बीमारियां भी मनुष्य के सही कारण के उसके मन से उखड़ कर उसकी समस्या से उसके और दूसरे लोगों पर परिचित हो जाने पर उसकी समस्या का हल हो जाने पर यह सभी मानसिक बीमारियां खत्म हो जाती है लेकिन कुछ अनुवांशिक बीमारियां होती हैं जो मेटाबॉलिक डिसऑर्डर हैं वह खत्म नहीं हो सकती ।
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