स्पर्श का महत्व मनुष्य की अवधारणा पर निर्भर करता है। स्पर्श दो प्रकार का होता है नंबर 1 प्रिय स्पर्श अपने निजी लोगों के द्वारा , सभ्य सुसंस्कृत लोगों के द्वारा किया जाता है । जिसमें स्पर्श किए जाने पर स्पर्शित वाले व्यक्ति को , महिला को बच्चों को बालिकाओं को पशुओं को, दुख नहीं होता @ अपितु मानसिक शांति आनंद अनुभूति और ऊर्जा आपूर्ति अनुभव होती है। इससे गुड टच मानवीय संविधान की भाषा में कहा जाता है।
दूसरे प्रकार का अप्रिय स्पर्श कहा जाता है जो अप्रिय लोगों के द्वारा , अवांछित लोगों के द्वारा किया जाता है । इस अप्रिय स्पर्श को काटना , चोंंटना , चाटना , कौंचना , खौदे लगाना , खुद्दी मारना आदि अनेक भद्दे शब्दों में कहा जाता है । इस अप्रिय स्पर्श से स्पर्श होने वाले मनुष्य को मानसिक पीड़ा , शारीरिक पीड़ा अनुभव होती है । परंतु इस अप्रिय स्पर्श को अधिकतर अपराधी लोग या शेडिस्ट पर पीड़िक लोग किया करते हैं जिसमें मनुष्य को दुख की अनुभूति और ऊर्जा हीनता की अवस्था महसूस होती है । अप्रिय स्पर्श को बैड टच कहा जाता है यह मानवीय संविधान की भाषा में अपराध है जिसके लिए मनुष्य को तरह-तरह की दंड धाराएं संविधान में वर्तमान में लिखी गई है अतः प्रत्येक मनुष्य को बैड टच/ अप्रिय करने से पहले सोचना चाहिए।
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