तर्कसंगत विचारधारा या लॉजिकल थिंकिंग के लिए मनुष्य के गहन तम विशाल अध्ययन की आवश्यकता होती है ःइसके अलावा उसे व्यापक सामाजिक संबंधों की समझ होनी चाहिए जिसमें वह ज्यादा से ज्यादा लोगों से मिलकर अपनी समस्या उनके सामने रखकर उनसे प्राप्त मिले हुए उत्तरों को अपनी बहु विकल्प के रूप में प्रयोग कर सकें । अक्सर जब भी कोई लोग बात करते हैं तो उसके बारे में प्रमाण मांगते हैं और व्यक्ति का प्रमाण प्रस्तुत कर देना ही लॉजिकल थिंकिंग कहा जाता है । लॉजिकल थिंकिंग एक अदालती भाषा है जिसका उपयोग वकील लोक अदालत में अपने वाक्य व्यंग वालों को तर्क के रूप में चलाने में उपयोग करते हैं । यह प्रमाण सबसे पहले आसानी से व्यक्ति अपने द्वारा पढ़ी गई निजी पुस्तक से देता है ,तो वह दृढ़ता से देता है उस पर लोगों को विश्वास जल्दी हो जाता है । इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति किसी भी व्यक्ति की बात को अपने तर्क से उड़ाना उखाड़ना चाहता है तो वह उसके लिए तरह-तरह के अपवाद का सहारा लेता है ः यह अपवाद तर्क लोगों के द्वारा मिलकर लोगों से ही सीखे जाते हैं ।या फिर गहनतम्ध्ययन में इस अपवाद तर्क कला का पता लग जाता है । मनुष्य वाक तीर चलाने में एक्सपर्ट हो जाता है ।
वैसे लॉजिकल थिंकिंग का अर्थ लंबे समय तक किसी एक विषय वस्तु से संबंधित विचारों का निरंतर मस्तिष्क में आना या किसी मनुष्य का किसी एक विषय पर लंबे समय तक धाराप्रवाह बोलने की कला लॉजिकल थिंकिंग कही जाती है क्योंकि उसमें उसका मस्तिष्क उस विषय से संबंध पूर्व संचित विचारों को क्रमश एक-एक करके निकालने लगता है और वह मनुष्य बिना रुके लगातार धाराप्रवाह 1 मिनट से लेकर 2 घंटे तक बोल सकता है । जो मनुष्य जितने अधिक लंबे समय तक धाराप्रवाह वस्तु केंद्रित बोल सकता है वह उतना ही अच्छा लॉजिकल थिंकर होता है ।इसमें जो मैंने महसूस किया हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी का लाजिकल थिंकिंग का जवाब नहीं जो किसी भी व्याख्यान को लगातार 2 घंटे तक बिना रुके बोल सकते हैं ।
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