आदि शंकराचार्य द्वारा परकाया प्रवेश के बारे में पढ़ा था, क्या परकाया प्रवेश सचमुच संभव होता है?


इस प्रश्न का जबाब श्रूति सुनी सुनाई बात जो कही गई हो या पढ़ी गई हो पर विश्वास करने पर आधारित है ।इसके उत्तम प्रमाण प्रत्यक्ष नेत्र दर्शन संभव नहीं तथा अधम् प्रमाण अपनों के द्वारा कर्ण श्रृवण दिया गया प्रमाण सुनकर विश्वास करना भी संभव नहीं है।

सन् 1983 में हमारे एक परिचित कुंवर पाल ने जो हाथरस जिला अलीगढ़ के निवासी थे उन्होंने बताया कि उनका छोटा भाई ईंजन की चपेट में आकर मर गया था ।गांव में स्वांग हो रहा था तभी एक आदमी स्वांग देख रहा था अचानक चिल्लाने लगा मैं नेत्र पाल हूँ मैं ईंजन की चपेट में आकर मर गया हूँ मुझे बचा लो उसने घटना स्थान का वर्णन करते हुए बताया था कि मेरे बचने की उम्मीद कम है लेकिन जैसे भी हो सके तो मुझे बचा लो । बाद में वह मर गया था । इस संस्मरण को चली हुई बात पर बताया था ।

इसका जबाब ह मेरी सहमति स्वीकृति में

हां है ।।।।.

आपके इस प्रश्न के इससे पहले भी दो जबाब आ चुके हैं जो कोरा पर पहले से मौजूद हैं जिनसे आप संतुष्ट नहीं हैं ।

इस प्रश्न के दोनों उत्तरों पर मैं संतुष्ट हूँ ।

आपके प्रश्न का जबाब मेरे पास नहीं है

हाँ इसके लिए आपको सुझाव है कि जब तक आप तंत्र शिक्षा क्षेत्र में नहीं शिक्षित होंगी तब तक आप संतुष्ट नहीं हो सकतीं हैं।

इसके लिए आप किसी सिद्ध प्रतिष्ठित तांत्रिक से शिक्षा लेकर स्वयं साधना से खुद को दीक्षित करें ।

इसका जबाब मध्यप्रदेश के मंडला बस्तर जिले में आदिवासी लोगों के मध्य मिले सकता है ।या फिर उड़ीसा में

उल्लेखनीय बात यह है कि तंत्र शिक्षा प्राचीन भारत के द्रविड़ लोगों की प्राचीन विद्या है । जो वर्तमान में आर्यन शिक्षा पद्धति और इस्लाम शिक्षा पद्धति व इसाई शिक्षा पद्धति से अलग है।


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