कभी-कभी भवनाये व्यक्ति पर हावी क्यों हो जाती है ?


भावनाएं कभी कभी नहीं अक्सर मनुष्यों पर हावी होती हैं ।बस इसमें फर्क यह है जिन लोगों का अपने मन मस्तिष्क पर नियंत्रण होता है ।वह भावनाओं को नियंत्रित कर लेते हैं ।परंतु जिन लोगों का अपने मन मस्तिष्क विचार स्खलन पर नियंत्रण नहीं होता वह भावनाओं में अक्सर बहे रहते हैं ।भावनाओं की अवस्था में बह जाने पर मनुष्य राय रोने लगते हैं , उनका स्वर भंग हो जाता है , वह दीर्घकाल तक एक नियंत्रित स्वर में नहीं बोल पाते हैं , इसका कारण यह है कि उस समय उनका मस्तिष्क का सक्रिय भाग चैतन्य मन निष्क्रिय हो जाता है , और मस्तिष्क का अति कम सक्रिय भाग अवचेतन मन सक्रिय हो जाता है ।जब अवचेतन मन सक्रिय हो जाता है तो मनुष्य सच्चाई को लंबे समय तक नहीं छुपा पाता । ऐसी स्थिति में वह प्राय भावनाओं में बहकर सच बोल जाने पर मजबूर हो जाता है । इसीलिए कहा जाता है कि भावनाओं में मत बहो । अपने स्वर ध्वनि पर नियंत्रण रखो । प्राय देखा जाता है कि पुरुष अपने रूढ़िवादी स्वभाव के कारण भावनाओं का गलत उत्तर देकर अपने आप को भावनाओं पर नियंत्रित करना बताते हैं ।जबकि इस्त्रियाँ अपने रूढ़िवादी स्वभाव के कारण भावनाओं का सही उत्तर न देकर अपने आपको भावनाओं पर नियंत्रण करना बताती हैं । यह दोनों ही बातें ठीक नहीं है ।।

भावनाओं पर नियंत्रण प्राय बच्चे और वृद्ध स्त्रियां कम रख पाते हैं , लेकिन ऐसा नहीं है कि कोई व्यक्ति भावनाओं पर नियंत्रण रख पाए , कोई अपनी भावनाओं को बहुत जल्दी व्यक्त कर देता है , तो किसी को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में समय लगता है । हिटलर जैसे क्रूर व्यक्ति को लोग भावना नियंत्रित कहते थे लेकिन वही हिटलर 1 दिन लोगों ने रोते हुए देखा जब उस हिटलर का पालतू तोता मर गया था । कहने का अभिप्राय यह है कि भावनाओं की अभिव्यक्ति हम तभी सही कर पाते हैं जब हमारा किसी से सही मानसिक बौद्धिक लगाव होता है । यदि हमारा किसी से मानसिक बौद्धिक लगाव नहीं होता तो हम उसका उत्तर देने की उपेक्षा करते हैं ।दूसरे की अपेक्षाओं पर कुठाराघात करते हैं इसका अभिप्राय यह नहीं कि हम अपनी भावनाओं पर नियंत्रण कर रहे हैं ।

ब्रा क्रूर व्यक्ति को भावना नियंत्रित कहा जाता है लेकिन मैं इससे सहमत नहीं क्रूर व्यक्ति दूसरों की अपेक्षाओं पर सदैव कुठाराघात करता रहता है वह अपने हंसने के लिए सदैव दूसरों को रुलाना पसंद करता है रुलाता रहता है। परंतु जब कभी व्यक्ति क्रोधित अवस्था में होता है और वह हिंसक भावना लेता है तो ऐसे में उसके हिंसक भावों को भी उसकी भावनाओं में बहना कहा जाता है जिस पर वह बाद में पश्चाताप करता है ऐसा नहीं है कि केवल रोने वाले व्यक्ति भी भावुक होते हैं बल्कि क्रोध मनुष्य की भावा वेश में बहने की उच्च अवस्था होती है। अतः मैं यही कहूंगा की भावनाएं सदैव मनुष्य पर हावी रहती हैं बस भावना प्रतिक्रिया में थोड़ा बहुत समय लग जाता है कोई भावना की प्रतिक्रिया बहुत जल्दी दे देता है तो किसी को भावना की प्रतिक्रिया देने में समय लग जाता है जैसे हिटलर।


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