उत्तर ह नहीं :;
सात फेरे नहीं यह साथ उर्जा चक्रों के मिलान का विधान हैं जिन्हें अग्नि की परिक्रमा करते हुए जोड़ने का संकल्प लिया जाता है इसमें 3:1/2चक्र स्त्री के पहले और बाद के 3:1/2 तक पुरुष के होते हैं ।आपने जो लिखा है कि सात फेरे लिए हैं तो पति जब-जब जिस्मानी संबंध बनाने के लिए जबरदस्ती कर सकता है। तो इसका जवाब यह है यौनसंबंध बनाने के लिए कामसूत्रकम् / जयमंगला शिक्षित/ रसिकप्रिय साहित्यिक शिक्षित मनुष्यओं में जिन्होंने रसिया साहित्य पढ़ने के बाद यौनांग में संरक्षित यौनांनंद का स्वाद प्राप्त कर लिया है। उनके लिए यौनसंबंध बनाने के लिए/जिस्मानीम संबंध बनाने के लिए पुरुषों का स्त्रियों से जोर जबरदस्ती करना उचित नहीं है बल्कि स्त्रियां ही यौन आनंद लेने के लिए यौन आनंद दाता पुरुष सानिध्य की इच्छा में विकल रहा करती हैं । जो भी स्त्री पुरुष प्रदत एवं आनंद को प्राप्त कर लेती है वह उस यौनांनंद दाता की खोज में हरदम तैयार रहती है । यह यौन आनंद धरती पर प्राप्त सभी तरह के आनंद और सुखों से सर्वोपरि है जिसे केवल मनुष्य मात्र ही ले सकते हैं पशुओं में योन आनंद की अनुभूति केवल मांसाहारी जीव और प्राइमेट या बुद्धि जीवों विकसित जीव की पुरुषों और मादाओं को होती है।
काश आपने श्रंगार साहित्य या रसिक साहित्य पढ़ा होता जैसे किस्सा तोता मैना बेताल पच्चीसी सारंगा सदाबृज कामसूत्र जयमंगला पंडित कोक चंद का कोकशास्त्र पंडित इंंदरमन सूतैल का किस्सा गंगाराम पटेल बुलाकी नाईआदि अनेक रचित ग्रंथ है ।तो आपको यौन संबंध और यौन आनंद की सार्थकता का ज्ञान होता फिर आप ऐसे सवाल नहीं भेजती । बाबा बुल्ले शाह ने कहा है आदमी के बनाये बुत / मूरत / सूरत मुनाफिक/मुशिरक लोग निहारा करते हैं । जिन्हें खुदा के बने बुत खुदा की बनी सूरतें //मूर्तियां ठीक से नहीं देखी। ठीक से देखना नहीं आता।
मनुष्य समाज में सभ्य मानव समाज में स्त्रियों के साथ जोर जबरदस्ती या बलात्कार करना अपराध कहा जाता है । बलात्कार करने का करने का मानव समाज में कोई प्रावधान नहीं है । बलात्कार तो पशु समाज तक में भी नहीं होता है पशुओं में भी नर पशु मादा पशु की सहमति के बाद ही उससे संबंध बनाते हैं। सच तो यह है कि अभी तक आपको जिस्मानी संबंध बनाने के दौरान स्त्री और पुरुष के शरीर से निकली सकारात्मक निर्माणात्मक ऊर्जा के दौरान असीम आनंद की अनुभूति का पता नहीं ह ।जिसे प्राप्त करने के लिए पशु भी मौत को भूल जाते हैं और वह भी यौन संबंध बनाते समय इतने अधिक निर्भय निडर हो जाते हैं कि उन्हें यौन संबंध के दौरान ऊर्जा हीनता से गिरने का होश नहीं रहता है ।
आपके प्रश्न से ऐसा लग रहा है जैसे आप उन यौनअतृप्त आत्माओं का सवाल उठा रही हैं जो यौन क्रीड़ा के दौरान नपुंसक पुरुष से या मोटे पेट वाले भारी शरीर पुरुष के भार /वजन से यौनक्रियाकर्म में शरीर भार से पीड़ित होती हैं। या उन्हें शारीरिक असुविधा का सामना करना पड़ता है शारीरिक सफाई की समस्या आती है लेकिन यौनक्रीड़ा के दौरान पहले या बाद में भी यौनक्रियाकर्म का आनंद प्राप्त नहीं होता है।
या आप कानूनी सलाह ले रही हैं इसके लिए आपको अदालत में जाना चाहिए वकीलों से सलाह लेनी चाहिए । कोई भी व्यक्ति शादी के बाद या शादी के पहले किसी भी महिला से उसकी बिना मर्जी के योन संबंध नहीं बना सकता यदि कोई व्यक्ति किसी महिला की बिना मर्जी से उससे यौन संबंध बनाता है तो संविधान में इसके लिए बाकायदा तरह-तरह के एक्ट के तहत दंड व्यवस्था है कुछ समय पहले पंजाब में एक महिला ने शादी के 17 साल बाद अपने पति पर बलात्कार का केस दायर किया था और उसे सजा भी मिली थी कहने का अभिप्राय यह है जो लोग पढ़े लिखे होते हैं वह कायदे कानून मानते हैं और ऐसा असभ्य व्यवहार नहीं करते हैं लेकिन जो लोग अनपढ़ हैं कम पढ़े लिखे हैं जिन्हें कायदे कानून का ज्ञान नहीं है ऐसा दुर्व्यवहार ऐसी सभ्यता ऐसा अपराधिक कृत्य अक्सर वही करते हैं अब यह आपकी मर्जी पर निर्भर है कि आप अपनी शादी या दांपत्य जीवन पढ़े-लिखे संवेदी लोगों के साथ बिताना पसंद करेंगी या अनपढ़ लोगों के साथ शादी संबंध बनाकर योन संबंध आनंद अनुभूति उचित मात्रा में लेना पसंद करेंगी ।वैसे नेचर में देखा गया है अधिकतर पशुओं में मादाएं बलात्कार का ही शिकार होती हैं । यदि यौन आनंद अनुभूति अधिक मात्रा में करनी है तो उसको आपको जीव विज्ञान के नियमों के अनुसार अपने जीवन को आदम पशु के रूप में जीना पड़ेगा लेकिन यदि आप शिक्षित और पढ़े लिखे संविधान की बात करती हैं तो संविधान में यौन आनंद जैसी चीज कहीं पर भी लिखित नहीं है बल्कि इसमें यौन आनंद के पूर्व प्राप्त पीड़ा अपराध के रूप में दर्ज है जैसा कि मैंने लिखा है आलिंगन चुंबन नख दंत छरण आदि मंद पीड़ादायक क्रियाएं हैं यदि कोई पीड़ा दाई क्रियाओं को करते समय स्वविवेक का इस्तेमाल करता है साथी की भावनाओं का ध्यान रखता है तो क्रियाएं आनंददायक लगती हैं ।लेकिन जब कोई इन क्रियाओं को करते समय दूसरे साथी की पीड़ा संवेदना भावनाओं का ध्यान नहीं रखता और पशुता की ओर उतरता चला जाता है तो यह परम आनंद दाई कृत्य यौन क्रीड़ा कर्म भी अपराधिक कृत्य में बदल जाता है।
वर्तमान में जल्दी में फेसबुक पर एक विचित्र केस आया था जिसमें एक महिला ने अपने आदर्शवादी पति से इस बात पर तलाक लेने की इच्छा की थी कोर्ट में केस डाला था कि उसे अपने आदर्शवादी पति से तलाक चाहिए क्योंकि उसका पति इतना आदर्शवादी है कि वह उसे मानसिक शारीरिक यौनांगनिक पीड़ा नहीं देता है ।
( स्त्रियों की कोशिकाओं में एक्स क्रोमोसोम के अंदर मैंसोचित पीड़ा पाई जींस पाया जाता है जिसके प्रभाव से स्त्रियां पुरुषों की तुलना में कई गुना अधिक मानसिक शारीरिक पीड़ा जैसे प्रसव पीड़ा सहन कर लेती हैं जबकि पुरुष प्रसव पीड़ा के स्तर को सहन करने के लिए दो-तीन बार मर्कर जन्म लेगा तब उस प्रसव पीड़ा के बराबर पीड़ा सहन कर पाएगा।जबकि पुरुषों की कोशिकाओं में वाई क्रोमोसोम के अंदर सैडिस्टड या पीड़ा दाई जींस पाया जाता है )
विवेक पूर्ण संघर्ष से ही जीवों को जीवन में रसपूर्ण तरीके से जीवन जीना आता है । विवेक पूर्ण संघर्ष स्वभाव आदत बन जाने पर मनुष्य ऊर्जा वानवान ईनरजैटिक स्फूर्ति मय शरीर बना रहता है । जीवन की सार्थकता का पता विवेक पूर्ण संघर्ष पूर्ण तरीके से जीवन जीने में चलता है । संघर्ष हीन जीवन और अत्यधिक आदर्शवाद मनुष्य तो क्या पशुओं को भी निकम्मा बना देता है।ऐसे रश्मि आदर्शवादी पुरुष की उसे कोई आवश्यकता नहीं है। जो संघर्ष हीन जीवन जीने में विश्वास रखता है और उसे शारीरिक मानसिक पीड़ा का एहसास नहीं कराता है या शारीरिक मानसिक पीड़ा नहीं देता है।
परंतु यदि आप इसका जीव विज्ञान के आधार पर उत्तर की इच्छा रखती हैं तो यह अलग है। डब्ल्यू एच ओ की रीप्रोडक्टिव हेल्थ की परिभाषा के अनुसार यह यौन आनंद केवल उन्हीं लोगों को प्राप्त होता है जो फिजिकली फिट , मेंटली फिट, इमोशनली फिट बिहेवियर फीट ,और रिप्रोडक्टिव एक्टिविटी ,रिप्रोडक्शन रिजल्ट पर समाज में रिप्रोडकशन्ली सोशली फिट होते हैं।
इनकी व्याख्या विकिपीडिया पर या गूगल पर ठीक से देखना।
कामसूत्र में आलिंगन , चुंबन , प्रहणन , नख दंत प्रहार संवेशन घर्षण और समरति से कामकाम संतुष्टि पर विशेष लिखा गया है परंतु असम रति और विषम रति को बुरा बताया गया है। कामवासना काम भावना संतुष्ट नहीं होने पर स्त्रियों का विकृत हिंसात्मक व्यवहार ;- पुरुषायत और पुरुषों का विकृत व्यवहार स्त्रायत (सीमाहीन अतिसहष्णुता युक्त भीरु डर्रु परमसमझौता वादी संघर्ष से दूर) पर लिखा गया है।
इसके जवाब के लिए कोरा लेखक मंडल ने प्रमाण मांगा है मैंने इसमें मध्य में कई जगह प्रमाण के रूप में उन पुस्तकों के नाम लिख दिए हैं इस प्रश्न के जवाब आर्टिकल को लिखने में मैंने कामसूत्र ग्रंथ के अति आवश्यक शब्दावली टर्मिनोलॉजी का उपयोग किया है किसी को ज्यादा और जानकारी चाहिए तो वह काम सूत्रम् किताब मार्केट से खरीदे पढ़ें।
और मेरा परिचय कोरा पर दर्ज है।
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