निर्माल्य का अर्थ समझना काफी नहीं है ःः यदि हम निर्मल शब्द की व्याख्या करते हैं तो इसका अर्थ है निर्मल बिना मल का ःः ऐसा असंभव शब्द बड़े समझदार लोगों ने बना दिया है जो कि जमीन पर संभव नहीं है जैसे मन के अंदर भी अप्रिय विचार डरावने विचार निर्थक विचार मल रूप में पाए जाते हैं । तन की मलिनता निरंतर साफ किए जाने पर भी दूर नहीं होती । यह था निर्मल का अर्थ ।।
बुद्ध के अनुसार निर्माल्य का अर्थ है मानव के मानस पटल /चित्त या मन के चित्रकार इतना निर्मल हो जाना की जब भी आंखें बंद हो , तो आंख बंद करने पर नेत्रों के शक्ति चक्र चालक या विविध रंग या विविध दिवास्वप्न के स्थान पर बिल्कुल पारदर्शी नेत्रपट /दर्पण या सीसे के समान दिखाई देना चाहिए जिस पर हम जब चाहे जहां चाहे अपनी मनचाही सूचना मनचाहा वीडियो देख सकें। मानसपटल का सी.सी.टी.वी. की तरह से अपने हित में दूसरे लोगों के हित में जब चाहें सदुपयोग कर सकेंं । संजय ने जो महाभारत के दृश्यों का टेलीकास्ट किया था उसका मुख्य कारण संजय के साधारण मानसपटल का निर्माल्य मानसपटल में परिवर्तित होना था /बदलाव आ जाना था ।
इस पैराग्राफ की लाइनें कुछ साधारण लोगों को एक मूर्ख बनाने वाली बातें लग सकती हैं या काल्पनिक असंभव बातें लग सकती हैं लेकिन व्यवहार में ऐसा होता है मैंने स्वयं शक्ति चक्र चालन , दिवास्वप्न अवस्था , नेत्रों से विविध रंगों का अपने मानसपटल में तरह तरह के रंगों का रंगीन दर्शन किया है ।परंतु निर्मली मानस पटल दर्शन अभी तक नहीं आ पाया है । वैसे भी मैंने इस दिशा में प्रयास नहीं किया है यह निर्माल्य मानसपटल कुछ लोगों को जन्मजात सिद्ध विशेष अवस्था प्राप्त होती है । जिससे वह बिना सिद्धि किए ही दूर की बातें अपने मानस पटल पर देख कर बता सकते हैं जिससे टेलीपैथी कहा जाता है । लेकिन टेलीपैथी जनसाधारण में आसानी से उपलब्ध मानस गुण नहीं होता यह प्राकृतिक होता है जिसमें अधिकतम सिद्धि लक्षण होता है । यदि हम टेलीपैथी को सीखते हैं या सीखना चाहते हैं तो वह अप्राकृतिक कहा जाता ह ।उसमें न्यूनतम सिद्धि लक्षण प्राप्त होता है । ऐसे न्यूनतम सिद्धि लक्षण प्राप्त लोगों के फोरकास्ट या भविष्य अनुमान विश्वसनीय नहीं होते । लेकिन फिर भी प्रयास किया जाए तो ऐसा व्यक्ति दूसरों का भविष्य अनुमान भविष्य दर्शन भले ही ना कर सके लेकिन अपना भविष्य दर्शन अपने मानस पटल के दर्शन में कर सकता है । लेकिन इसके लिए उसे साधनाएं करनी होंगी ।
जिनमें सबसे पहला आता है शक्ति चक्र चालन मानव के नेत्रोंं में मानसपटल की त्रययी गति जिसमें मानसपटल में चित्त की स्थिरता प्रथम गति इससे सम्मोहन विधा की शुरुआत होती है , मानसपटल की वामावर्त द्वितीय गति , मानसपटल की तृतीय दक्षिणावर्त गति मुख्य हैं मानस पटल की वामावर्त दक्षिणावर्त गति दर्शन नियंत्रण सिद्ध हो जाने पर मनुष्य जादू कला मेंटल मॉडल सिस्टम में पारित हो जाता है । मानस पटल में नेत्रों के अंदर विभिन्न प्रकार के रंग दर्शन यह स्वभाव से होती है या शारीरिक रुग्ण स्वास्थ्य की अवस्था पर निर्भर है शरीर की शुद्धि अवस्था में चलित शक्ति चक्र चालन या मानस पटल का रंग शुद्ध पीला नारंगी लाल हरा या नीला होता है परंतु बीमार होने पर मानस पटल कारण शुद्ध ना होकर मिश्रित रंग हो जाता है जैसे नारंगी बैंगनी आदि । जो लोग इस शक्ति चालन में सिद्ध हो जाते हैं वह अपनी शक्ति चक्र चालन को अपनी इच्छा के अनुसार वामावर्त या दक्षिणावर्त चला सकते हैं । विशेष बात यह है कि जिन लोगों के मानस पटल का रंग आखें बंद करने पर /मूंदने पर बिल्कुल काला होता है । जिनका मानस पटल शक्ति चक्र चालन अवरुद्ध /रुका हुआ होता है ऐसे लोगों के लिए यह लाइन निर्माल्य दर्शन की , कल्पना दर्शन की आंखें बंद करके इच्छा अनुसार अपने मानस पटल से चित्र निकाल कर उन चित्रों को बार-बार साकार देखना या अपने नेत्रों के मानस पटल के विविध रंगों में जीवन भर खोए रह जाना नेत्र बंद करके तरह-तरह के प्राकृतिक दृश्य देखते हुए खो जाना उनके लिए निर्माल्य दर्शन , कल्पना दर्शन देवा दर्शन पुणे देखे का पुनर स्मरण स्मृति या जीवंत दर्शन प्रक्रिया जो जीवन में प्रगति या तरक्की के लिए जरूरी होती है । जो मस्तिष्क की चित्र सक्रियता या वीडियोग्राफी सक्रियता पर निर्भर करती है उन काले रंग के छतरी चक्र चालन वाले लोगों का का मस्तिष्क पूर्ण क्षमता से सक्रिय कार्य नहीं कर पाता जिससे उनकी प्रगति जीवन भर बंद रहती है।मैंने बेसिक त्राटक विधायक इस निर्माण लेके मानस पटल ज्योति दर्शन अवस्था में विविध स्तर प्राप्त किए हैं लेकिन इसका अंतिम निर्णय स्तर अवस्था अभी प्राप्त नहीं हो सकी है। शेष है जो बाद में समय-समय पर जोड़ा जाता रहेगा
No comments:
Post a Comment